सोमवार, अगस्त 18, 2008

वैमनस्यता, बिखराव और विभाजन क्या यही है आजादी

जिस आजादी को पाने के लिए कई नौजवान शहीद हो गए, क्रांतिकारियों ने अपने देश के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाने से गुरेज नहीं किया, उसी आजाद देश की युवा शक्ति आज इतनी दिग्भ्रमित हो चुकी है कि कहीं वो प्रांत, कही कस्बे और कहीं आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर बवाल खड़ा करती रहती है, फिर चाहे व सिमी जैसा छात्र संगठन हो या बीजेपी की युवा बिग्रेड केवल कुछ निहित स्वार्थों की वजह से अपने ही देशवासियों का खून बहाने से नहीं चूकता यह युवा वर्ग। कोई इनसे जाकर पूछे कि धर्म और प्रांत को लेकर लड़ी जा रही इस लड़ाई में इन युवाओं को क्या हासिल होना है। अपने को क्रांतिकारी और प्रर्दशनकारियों का तमगा देने वाले यह युवा क्या भूल गए है कि महज २३ साल की उम्र में अंग्रेजों को भारतीयों की एकजुटता का एहसास कराने के लिए फांसी पर चढ़ जाने वाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने कभी किसी एक धर्म या संप्रदाय के लिए आजादी की कल्पना नहीं की थी। उन्होंने तो इसी आजादी की चाह की थी जिसमे हमारा देश हर दिशा में प्रगति करें। वह यह कभी नहीं चाहते थे कि अमरनाथ भूमि विवाद हो और कहीं नंदीग्राम सा संग्राम हो। कहां भटक गया हमारा वह आजादी का स्वप्न जिसके लिए हम आज भी उनींदे है। क्यों नहीं देश का हर नौजवान अपने जोश और जज्बे को देश को प्रगति पथ पर दौड़ाने में योगदान देता। सड़क पर भीख मांगते बच्चों महिलाओं और भूख से तड़पते अपने ही हम वतनों को देखकर हमारा अर्न्तमन क्यों हमें नहीं कचोटता, क्यों हम नहीं सोचते की इन्हें भी भोजन, कपड़ा और मकान दिलवाने के लिए हम कुछ करें, हम क्यों उलझते है बेकार के भूमि विवादों में, पृथक राज्यों की मांग में और निहित स्वार्थों के मायाजाल में। क्यों नहीं स्वीकारते देश की संपूर्णता और संमप्रभुता। क्यों वैमनस्यता, बिखराव और विभाजन के रास्ते पर चलकर कठिनाईयों से पाई इस आजादी को एक अभिशाप बनाते है।

10 टिप्‍पणियां:

शोभा ने कहा…

अच्छा लिखा है। स्वागत है नए ब्लाग का।

शहरोज़ ने कहा…

bahut umda post.
bahut sambhavnayen hain , aur hamari apeksha vyarth nahin.likhte rahiye.
vicharon aur shabdon ka abhav aake opas nahin hain.
kabhi samay mile to is taraf zarur aayen.
http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/

aur haan ye word verification hata dijiye.

Abhi ने कहा…

bahut achha, Rachna ji.

Amit K. Sagar ने कहा…

nice. keep it up.

"VISHAL" ने कहा…

achchha likhte hai aap.lekin simi aur B.J.P. ko ek hi najariye se dekhna theek nahi. SIMI ek atankbadi sangthan hai.
vishalvermaa@blogspot.com

"VISHAL" ने कहा…

achchha likha hai aapne. lekin BJP ki SIMI se tulna theek nahi. SIMI ek atankbadi sangthan hai.
चाहे व सिमी जैसा छात्र संगठन हो या बीजेपी की युवा बिग्रेड
vishalvermaa.blogspot.com

ye word verification hata dijiye.

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

Ache wichar rakhen hai aapne.ch

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन आलेख.

सजीव सारथी ने कहा…

नए चिट्टे की बहुत बहुत बधाई, निरंतर सक्रिय लेखन से हिन्दी चिट्टा जगत को समृद्ध करें...
आपका मित्र
सजीव सारथी
आवाज़

विनीत उत्पल ने कहा…

kya bat hai. maja aa gaya aapkee bebaak lekhan ko padhkar. keep it up.